अनंत हिम साहित्य
आपने परदेशो री बातो ,त्वंरी म्हारी सोबी री बातो |
रविवार, 27 फ़रवरी 2011
muktak
अब आदमी का इक नया प्रकार हो गया
आदमी का आदमी शिकार हो गया
जरुरत नहीं आखेट को अब कानन गमन की
शहर में ही गोश्त का बाजार हो गया
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